सपना | Sapana | The psycho | Hindi Horror Thriller story |yogesh borse

 

 सपना :- The psycho  – Horror Thriller

 

अगली आनेवाली एक डरावनी कहानी 

लेखक :- श्री.योगेश वसंत बोरसे 

Sample :-

 

  “क्या हुआ ?”

 “कुछ नहीं ! “

 “तो चिल्लाए क्यों ? और पसिना  क्यों छूट रहा है ?… अरे। .. बोलो भी। …. कोई सपना देखा क्या ?  “

” हां ! “

“क्या देखा ?……… अरे बोलो न ?……… “

“तुम्हे। ….. तुम्हे  मरा हुआ देखा !… “

कुछ पल तो सन्नाटा छाया रहा , और फिर नेहा खिलखिलाकर हस पड़ी ! 

रोहन उसका मुँह देखता रहा ! कुछ पल हसने के बाद नेहा ने अपने ही मुँह पर हाथ रखा ,हसी रोकने के लिए ! फिर रोहन के बालो में हाथ फेरती हुई बोली ,

” फ़िक्र मत करो ! मै  इतनी जल्दी मरने वाली नहीं हूँ ! और मरूंगी तो भी तुम्हारे पास वापस आऊंगी ! मेरे प्यारे रोहन के पास वापस आऊंगी ! “

इतना कहकर नेहा रोहन से लिपट गयी और उसे प्यार से चूमने लगी ! 

   लेकिन रोहन अभी तक उस सपने में खोया हुआ था।  उसने रिस्पॉन्स नहीं दिया।  तो नेहा ने दोबारा पुछा ,

“अब क्या हुआ ?”

“नेहा , तुम मरनेवाली हो और तुम्हे हसी मजाक ,रोमांस सूझ रहा है ? “

  ”  क्यों ? तुम्हे अपने सपने पर इतना यकीन है ?”

” कहते है सुबह के सपने सच होते है !”

“लेकिन अभी तो रात के ढाई बज रहे है ! “

” नेहा सपने सच होते नहीं ,करने पड़ते है !”

“क्या ?” नेहा के कुछ पल्ले नहीं पड़ा।  

“तुम्हारा कहना ये तो नहीं की तुम मुझे मारने वाले हो ? “

“मैंने ऐसा तो नहीं कहा ! “

“तो क्या कहा तुमने ? “

“मैंने ये कहा की सपने सच करने पड़ते है ! पर मुझमे वो करने की ,सहने की हिम्मत नहीं है ! “

“क्या सहने की ?”

“वही ,तुम्हारी मौत और उसके परिणाम ! “

” ओह ,तो तुम मेरे साथ प्यार से नहीं ,डर से रह रहे हो ! “

“नहीं नेहा तुम गलत समझ रही हो ! “

“तो तुम समझाओ न ,गलत क्या है ? सही क्या है ?”

“नेहा , मेरा प्यार सच्चा है और तुम जो रिएक्ट कर रही हो ,वो गलत है ! ” 

नेहा के मस्तिष्क में चीटिया रेंगने  लगी ! तो वो सर पकड़कर बैठ गयी ! 

   उसे कुछ सुझा , वो झट से उठी ! फ्रिज की ओर बढ़ी ,पानी पिया।  

” पानी पिओगे ?”

रोहन कुछ नहीं बोला , नेहा ने जबरदस्ती उसके हाथ में पानी की बोतल थमा दी ! 

“एक बात कहू ? जो सोच रहे हो वो करने की सोचना भी मत ! वरना मेरा तो पता नहीं ,पर तुम जरूर मरोगे ! क्योकि मै मरने से ज्यादा मारनेपर विश्वास करती हूँ ! “

इतना कहकर वो बिस्तर पर लेट गयी ,रोहन की तरफ पीठ करके ! 

रोहन ने दो घुट पानी पिया ,बोतल का ढक्क्न लगाया ,बोतल पास वाले टेबल पर रख दी ,और मुड़कर नेहा की तरफ देखा ! 

   उसके खुले बाल रात के अँधेरे में बेहद खूबसूरत लग रहे थे ! नाइटी अपनी जगह पर बिलकुल फिट थी ! क्योकि नेहा थी ही इतनी फिट और खूबसूरत ! 

रोहन से रहा नहीं गया ,उसने नेहा को कसके अपनी ओर खींच लिया ! 

“अरे  …. अरे   …. अभी तो मेरे मरने की बात कर रहे थे और अभी तुम ही …. ”

नेहा आगे कुछ बोल नहीं पायी ! रोहन ने अपने होटों से उसकी जुबान बंद कर दी थी ! वो दोनों एक दूसरे में खो गए ! …… 

    सुबह जब नेहा उठी , तो उसके होश ठिकाने नहीं थे …. 

…..क्योंकि रोहन उसके बगल में मरा पड़ा था ! 

   उसने नींद में ही रोहन के शरीर पर हाथ डाला था !

लेकिन उसे कुछ अजीब सा लगा !

उसने आँखे खोलकर रोहन की ओर देखा ,रोहन की आँखे खुली की खुली थी जैसे उसे ही घूर रहा हो ! थोड़ी डर के कारन बड़ी हो गयी थी ! जैसे उसने कुछ बेहद डरावना देख लिया हो ! नेहा को उसकी हालत देखकर शॉक सा लगा ! 

     वो टकटकी लगाकर रोहन की ओर देखती रही और अचानक जोर से चिल्लाई ! चिल्लाते हुए बेड से निचे उतरी तो उसे होश आया की कपडे तो। .. वो नाइटी ढूंढने लगी जो रोहन के शरीर के निचे दबी पड़ी थी !

वो वैसे ही अलमारी की और भागी , वहा से दूसरी नाइटी निकालकार जैसे तैसे पहनकर बाहर की ओर भागी और सोफे पर सहम कर बैठ गयी !  

    कुछ पल ऐसे ही बित गए और अचानक मोबाईल की रिंगटोन कानो में गुंजी।  नेहा हड़बड़ा गयी ! रिंग की आवाज बैडरूम से आ रही थी और वहा रोहन की लाश पड़ी थी !

नेहा ने अपने कानो पर हाथ रख लिए !

  कुछ देर बजने के बाद रिंगटोन  बंद हो गयी जो रोहन का मोबाईल था।  कुछ देर सन्नाटा छाया रहा ! दोबारा रिंगटोन बजी लेकिन इस बार नेहा का मोबाईल बज रहा था ,ये उसकी रिंगटोन थी ! लेकिन वो भी बैडरूम में था और रिंगटोन माँ के इनकमिंग कॉल की सेट की हुई थी ! 

  अब नेहा ने हिमत जुटाई ,अपनी जगह से उठी और डरते सहमते बैडरूम का दरवाजा खोला और नजर अपने आप रोहन की जगह पर गयी तो वो हैरान हो गयी ! 

जगह खाली पड़ी थी ! वो हक्का बक्का हो गयी ! 

   ‘ लाश कहाँ गयी ?’

“नेहा ssss …  टॉवल देना। …. “

“ां ां ? …. “

“रोहन ? ये तो। … “

” नेहा। …. यार टॉवल दो ना ! या ऐसे ही बाहर आ जाऊ ? “

नेहा ने डरते सहमते चारो ओर देखा टॉवल टेबल पर पड़ा था , सहमते  हुए उठाया और बाथरूम की ओर बढ़ी !

” ये …  लो….. “

      रोहन ने झट से दरवाजा खोला और नेहा को अंदर खींच लिया और उसे लिपट गया ! नेहा डर के मारे बौखला गयी और एक झन्नाटे दार थप्पड़ रोहन के मुँह पर पड़ा ! वो गुस्से से आग बाबुल हो गया ,

“नेहा ! ये क्या बद्तमीजी है ? मै तो प्यार ही कर रहा था न ? भाड़ में जाओ ! ”

उसने नेहा को दूर धकेल दिया। 

“अगर आज के बाद मेरे आस पास भी आयी तो चिर के रख दूंगा ! “

वो टॉवल लपेट कर बाहर निकल गया ! नेहा बाथरूम के एक कोने में बैठ गयी सहमते  हुए ! सिसकते हुए ! 

तभी दोबारा उसका मोबाईल बजने लगा।  रोहन ने आवाज लगाई , ” नेहा तुम्हारी माँ का फोन है ! उठाना है क्या ? “

नेहा जैसे तैसे उठकर खड़ी  हो गयी और किसी यंत्र की भाती मोबाईल तक पोहोची ,

  “हेलो  ,मम्मी। …… मै  तुम्हे थोड़ी देर बाद कॉल करती हूँ। … हां।   सब। …… ठीक … है ! ” उसने फोन काट दिया।  

रोहन की तरफ देखा ,वो बाल सूखा रहा था ड्रायर से ! वो उसके पास गयी ,

“मुझे तुमसे बात करनी है ! “

” अरे भाड़ में जाओ तुम ! मै तुम्हारे बाप नौकर नहीं हूँ ! जो तुम्हारी हर हरकत सहता रहूं ! आदमी थकहार के घर पर आता है और बीबी से प्यार की अपेक्षा रखता है ,तो क्या गलत है ! गलत ही है ! और गलती मेरी है ,मैंने तुम्हे सर पर बिठा कर रखा है !

  अरे नाइट शिफ्ट करके आया था , दो तीन बार बेल बजाई पर तुम कभी जगी हो ? मैंने सोचा जाने दो और मेरी चाबी से लैच  खोल कर अंदर आया ,देखा तो तुम बिस्तर पर फैली पड़ी थी ! सोचा नहा लूंगा तब तक जाग जाओगी ,इसीलिए तुमको आवाज दी ! 

 और तुमने मुझे ये क्या इनाम दिया ?

 ये मत समझना की मै तुम्हे मार नहीं सकता ! वो तो तुम्हारी ताकद नहीं की मेरा एक थप्पड़ भी सह सको ! लेकिन अगली बार सोच के हाथ उठाना ,वरना तुम्हारी माँ को भी पता नहीं चलेगा की उसने कोई बेटी पैदा की भी थी या नहीं ! ” 

 नेहा चुपचाप उसकी बाते  सुन रही थी ! उसका दिमाग हिल गया था ! 

   ‘ अगर ये नाइट शिफ्ट में गया था तो फिर यहाँ कौन था ?

   अरे अगर क्या ?

इसके जाने के बाद मैंने ही तो दरवाजा बंद किया था ! और मेरी सोने की आदत मुझे पता है इसीलिए लैच लॉक लगाकर सोइ थी ?

फिर ?’

 उसने बिस्तर पर नजर डाली।  बिस्तर  पर उसकी नाइटी नहीं थी ! वो तो उसने पहनकर रखी थी ! 

  “अरे ,तुम्हे क्या साप सूंघ गया ? बोलती क्यों नहीं ? वरना अपने दिमाग का इलाज करा लो ! “

“रोहन। … जरा…..   मेरी बात सुनोगे ? ” उसने ठंडे लहजे में कहा ! 

“बोलो  ! अब क्या हुआ ? “

“तुम यहाँ बेड पर पड़े थे , और मै डर के मारे बाहर सोफे पर बैठी थी ! “

” अरे क्या बक रही हो ?”

 रोहन अभी तक गुस्से में ही था। और ये नींद न होने के कारन हो रहा था ! 

 “तुम्हारे सामने मै ड्यूटी पर गया , अब सुबह लौटा हूँ और तुम कह रही हो की मै बेड पर था ? किसके साथ सोई थी ? एक मिनट। .. मेरे जाने के बाद मेरी  पीठ पीछे ये गुल खिलाती हो ? “

“रोहन कुछ भी मत बोलो ,मेरी बात तो सुनो ! तुम बिस्तर पर मरे पड़े थे ,इसीलिए मै डरकर बाहर बैठी थी ! “

” क्या ? मै मरा पड़ा था ? और फिर तुम बाहर किसका इंतज़ार कर रही थी ? मेरे ही आने का ? या किसी और के आने का ? तुम किसी को फोन करती या फिर पुलिस को ही फोन करती ? “

” कितनी बार कहा है ,वो किताबे पढ़ना बंद करो ,उटपटांग किताबे पढ़ती रहती हो ? कुछ काम धंदा क्यों नहीं करती ? अरे कुछ काम करोगी तो दो पैसे आएंगे और ये खयालो की दुनिया से भी बाहर निकलोगी ! “

“रोहन ,बस करो ! मै कोई पागल नहीं हूँ ,हां थोड़ी भूल जाती हूँ ,मेरे दिमाग से निकल गया की तुम ड्यूटी गए हो ! “

” तो ?”

” तो क्या ?” 

“अरे आगे भी कुछ बोलोगी ?”

” हां ! तुम मेरे साथ खिलवाड़ कर रहे हो ! तुम रात में घर पर ही थे ! ढाई बजे जोर से चिल्लाए तो मेरी नींद टूटी ! तुम्हे जगाया तो तुम मेरे मरने की बाते करने लगे , फिर मैंने तुम्हे। ….. “

“अरे क्या बकवास कर रही हो ? रुको ,तुम्हारी माँ को ही यहाँ बुलाता हूँ ! “

“रोहन ,मेरी पूरी बात तो सुनो ? “

“बको ! “

“फिर मैंने तुम्हे समझा बुझाकर सुलाने की कोशिश की तो तुम मेरे आगोश में खो गए ! …. बाद में हम सो गए  ….. सुबह उठकर देखती हूँ तो तुम्हारी आँखे फटी की फटी थी ! जैसे कुछ देख के डर गए थे ,और तुम्हे देखकर मै डर गयी !

 अरे मैंने तो कपडे भी…. ये नाइटी भी तुम्हारे निचे दबी पड़ी थी तो मै अलमारी की ओर भागी ,वहा से दूसरी नाइटी निकाली और जैसे तैसे पहनकर हॉल में भागी और सोफे पर जाकर बैठ गयी ! “

    उसकी बाते सुनकर रोहन का गुस्सा थोड़ा ठंडा हुआ , 

‘ ये सचमुच अपना संतुलन खो बैठी है ! अपनी दुनिया में खोयी रहती है ! मै इसे ज्यादा वक़्त नहीं दे पाता  तो मेरे ही खयालो में खोयी रहती है ! ‘

  वो नेहा के पास गया , उसके सर के ऊपर से प्यार से हाथ फेरने लगा और उसे प्यार से चुम लिया ! तो नेहा उससे लिपटकर रोने लगी ! 

“मुझे बचा लो रोहन ! मुझे समझ में नहीं आ रहा है की मुझे क्या हो रहा है ? शायद मै पागल हो चुकी हूँ या होनेवाली हूँ ! या कोई मेरे साथ खिलवाड़ कर रहा है ! “

   ” नेहा ,तुम ये किताबे पढ़ना बंद करो ! शायद तुमने कोई सपना देखा था या वही जी रही थी ! लेकिन तुम्हारे अंतर्मन को पता था की मै सुबह आऊंगा इसलिए मुझे मरा हुआ देखकर भी तुमने न तो पुलिस को फोन किया न ही दरवाजा खोल कर बाहर गयी ! बस मेरा इन्तजार कर रही थी ! 

    मेरी मानो तो अपनी माँ से इस बारे में बात मत करना ! ये बात हम दोनों के बिच ही रखना ! मै तुम्हे कितनी बार समझा चूका हूँ की मुझे तुम्हारी माँ पर भरोसा नहीं है !

 वो अच्छी औरत नहीं है ! अपने स्वार्थ के लिए वो किसी भी हद तक गिर सकती है ! उसीने कुछ किया होगा और तुम पर क्या असर हुआ ये देखने के लिए ही फोन किया था ! 

  उनका फोन दोबारा आएगा तो कुछ मत बताना ! तुम फ्रेश हो जाओ ,हम डॉक्टर के पास चलते है ! “

” नहीं रोहन ! मेरी माँ ऐसा नहीं कर सकती ! वो मेरा बुरा क्यों चाहेगी ? “

” तुम्हारी मर्जी ! तुम्हे जो ठीक लगे वो करो ! डॉक्टर के पास भी जाना है या नहीं बताओ ! वरना अपनी माँ से अपना इलाज कराओ ! मै सोने जा रहा हूँ ! बस इसके बाद ये उटपटांग बाते मै  नहीं सहूंगा ! या तो तुम बंद करो नहीं तो मै इसका इलाज करूँगा ! “

इतना कहकर रोहन सोने के लिए बेड पर लेट गया ,

” सुनो ,थोड़े पैर दबा दो ! दर्द हो रहा है ! “

    नेहा उसके पास आकर बैठी , और पैर दबाने लगी। जैसे ही उसने पैरो को हाथ लगाया उसे अजीब लगा ,पैर ठन्डे पड  गए थे ! उसने रोहन के चेहरे की ओर देखा तो उसके होश उड़ गए !

 रोहन आँखे फाड़ कर सीलिंग की ओर देख रहा था और चेहरा भयानक लग रहा था वो जोर से चिल्लाई ! …. 

” क्या हुआ ? क्यों चिल्ला रही हो ?” रोहन उठकर बैठ गया ! 

नेहा  हैरान थी ! पसीने से लथपथ ! …. 

” नेहा  क्या हुआ। …? ” ……. 

 ” मैंने अभी तुम्हे मरा हुआ देखा  ! “

” क्या ?  तुम कही पागल तो नहीं हो गयी ? क्यों मुझे मारने  पर तुली हो ? उठो ,चलो ! ”  

” कहाँ ?”

” चलो ,पागलखाने ! तुम्हारा इलाज करना पड़ेगा ! “

नेहा  कुछ समझ नहीं पा रही थी ! क्या करे ? कही ये इसकी कोई चाल तो नहीं ?

 ” रोहन एक बात पूछू ? तुम मुझे पागल साबित करने पर क्यों तुले हो ? “

” मै क्यों तुम्हे पागल बनाऊ ? तुम्हारी हरकते पागल जैसी है ! नहीं जाना है मत जाओ ! मुझे सोना है ! आओ ! “

रोहन ने उसे अपने ऊपर खींच लिया और उसे कसके चूमने लगा ! नेहा  को भी यही चाहिए था।  पागलखाने जाने से अच्छा है ,यही सोचकर वो भी मजे लेने लगी ! 

लेकिन कुछ हुआ था ! रोहन आज थकावट महसूस कर रहा था ! न जाने क्यों दिल में दर्द उठ रहा था।  पर उसने उस और ध्यान नहीं दिया ! और नेहा  को अपने निचे दबोचकर उस पर टूट पड़ा ! झटके मारते मारते अचानक उसके दिल में दर्द होने लगा ! वो घबरा गया ,सांस फूलने लगी ! 

” रोहन क्या हुआ ? आज ताकद  नहीं है क्या ? “

  नेहा  ने तो सहज भाव से कहा था ,लेकिन रोहन को अपना अपमान लगा।  वो  सिने के दर्द को भूलकर ताकद लगाने लगा ! और वही हुआ ! जो नहीं हो सकता था !

 इधर वो शूट हुआ ,और एक तेज दर्द उठा जो दिल के अंदर तक पोहोचा और वो वही नेहा  के जिस्म पर ढेर हो गया !    

” रोहन क्या कर रहे हो ? हटो ! “
नेहा  ने उसे एक और धकेल दिया तो वो लुढ़क गया  ! उसकी आखे खुली की खुली रह गयी ! नेहा ने उसे इस हालत में देखा ,लेकिन उसे कुछ नहीं लगा।  वो अपने इनर ढूंढ रही थी जैसे तैसे कपडे पहने और रोहन की और बढ़ी।
” रोहन उठो ,कपडे पहन लो ! मुझे समझ में नहीं आता ,तुमसे होता नहीं तो क्यों करते हो ?”
“रोहन उठो। …”
  लेकिन रोहन अब इन सब बातों से परे पोहोच गया था।  नेहा  को समझ नहीं आ रहा था की ये हकीकत है या वहम ! अभी कैसे पता करे की  ये सचमुच मरा है या नहीं ?

उसने माँ को फोन लगाया ,

” हां ,मम्मी लगता है वो मर गया ! “

उधर से आवाज आयी। 

” बेटी किसकी बात कर रही हो ?”

” रोहन की ! “

” क्या हुआ ?”

” पता नहीं ,तुम जरा आओ न इधर। …”

“लेकिन बेटी ,मुझे कुछ न कुछ वक्त तो लगेगा न। ” 

” मम्मी ,प्लीज। … “

” ठीक है।  तुम बाहर जाकर बैठो ,मै पोहोचती हूँ। …. “

To be continued ….. 

 

BHUTATMA PUBLICATION

                       

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top