राज – RAAZ
हिंदी कविता
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| HINDI POEMS |
कवि : राज योगेश बोरसे
अभी अभी तो ये राज सिर्फ पता चला है
दो घड़ी आँखे बंद कर ली है, याद सबकुछ आ गया
प्यार,त्यौहार सब बाद में पहले अंदर से राज बाहर आ गया
जिंदगी ने खिलाए थे कुछ चक्कर कुछ ऐसे
क्या है वो अब समझमे आ रहा था
दौड़ लगाई उनकी तरफ, लेट गया उनकी गोदी में, और फूटफूट के रोया में उस दिन
क्या हुआ है आज, कोई भी समझ नहीं पा रहा था
ना मै – ना वो
इक राज का इकरार करके बेकरार क्यों हो गया मैं,
अभी अभी तो ये राज सिर्फ पता चला है
आज खड़ी है चेहेरे पे एक अलग मुस्कान, जो दबी पड़ी थी बरसो से
खिल पड़ी हर चीज वो, खफखफ़ा थी अरसो से
पूछा खुदसे आज, ये अलग अलग सा क्यों लग रहा है
अरे हां ! मैंने आज राज जो खोला है
वो राज था कुछ ऐसा, जो मैंने खोला है
बेहद अरसो बाद मम्मी – पापा को ‘ I LOVE YOU ‘ जो बोला है !
इक राज का इकरार करके बेकरार क्यों हो गया मैं,
अभी अभी तो ये राज सिर्फ पता चला है !
कवी : राज योगेश बोरसे
- ALL RIGHTS RESERVED AT RAJ BORSE & BGSM
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हिंदी कविता
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कवि : राज योगेश बोरसे
जिंदगी में किया हर काम दायरे में रहकर
हर बार जिया मै दायरे में रहकर
जो ललकार रहा था मुझे ,क्या मेरे जितना बनोगे ?
या इतना ही है तुम्हारा दायरा …….. ?

-: तू चल सदा :-
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कवी : राज योगेश बोरसे

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-: ये क्या बना दिया ? :-
किसी की तरफ देखकर मुस्कुरा दिया
तो हमें खुश मिजाज कह दिया ?
किसी के गम में शरीक हो गए तो रिश्तेदार बना दिया ?
किसी के गिरने पर हमें हसी आई तो आवारा कह दिया ?
किसी पर तरस खाकर उसे थोड़ी मदद कर दी
तो हमें खुदा बना दिया ?
किसी की गलती के कारन उस पर हाथ उठा दिया
तो हमें गुंडा बना दिया ?
दो चार गाने ढंग से गए लिए तो
हमें सिंगर बना दिया ?
किसी की जुदाई में थोड़े आंसू बहाये तो
हमें आशिक बना दिया ?
थोड़ी तरक्की कर ली तो
हमें घमंडी बना दिया ?
किसी की बुराई करने से अगर हम बुरे बन जाते है
तो किसी के बारे में अच्छा बोलने पर चापलूस बना दिया ?
हे भगवन ,तूने मुझे इंसान बनाया था ! लेकिन मै ये क्या बन गया ?
कवी :- श्री. योगेश वसंत बोरसे
- ALL RIGHTS RESERVED AT YOGESH BORSE & BGSM
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