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गॅलॅक्सी | Hindi Horror Story E Book |
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SAMPLE OF E BOOK :-
मि. चाफळकर और मैडम बाते करते करते अपना घर देख रहे थे।
और….. इतने मे एक चीख सबने सुनी , वैसे बच्चे आवाज की दिशा में भागे। चाफळकर मैडम फ्लॅट देखते देखते एक बेडरुम में गई थी। बच्चे भागते भागते वहा गए। तो वह डर के मारे पसीना -पसीना हो गई थी , मि. चाफळकर उनसे पूछ रहे थे।
” क्या हुआ ? “ लेकिन मैडम की जबान से एक शब्द नहीं निकल रहा था। वो सिर्फ सीलिंग की ओर इशारा करके थरथर कांप रही थी। मि. चाफळकर ने मैडम की पर्स खोली , उसमे छोटी पानी की बोतल थी। थोड़ा पानी उनके मुँह पे मारा , थोड़ा पीने के लिए दिया।
बच्चोने पूछा” मम्मी क्या हुआ ?”
मैडम सीलिंग की ओर इशारा कर रही थी , थोड़ी देर बाद वो थोड़ी नार्मल हुई , और बोली
” वहाँ एक औरत थी , छत से लटकी थी , जबान बाहर थी, मेरी तरफ देख रही थी !”
“क्या , क्या बात कर रही हो ? नया काम चल रहा है , यहाँ कोई रहता नहीं , फिर तुम्हे कैसे दिखेगी ? तुम्हारा वहम होगा। “
” नहीं ! वहाँ एक औरत थी , छत से लटक रही थी, जबान बहार थी , मेरी तरफ देख रही थी। “
” देखो ज़रा शांत हो जाओ , ऐसा कुछ नहीं है , तुम्हारा वहम होगा, हम यहाँ से निकलते है। “
उनकी आवाज़ सुनकर मि.हर्डिकर और स्टाफ का आदमी भागते- भागते ऊपर आये।
“क्या हुआ ?” मि. चाफळकर ने पूरी बात बता दी. तो स्टाफ का आदमी बोला ,
“ओ मैडम कुछ भी अफ़वाए मत फैलाइये ! नयी जगह है , नया काम है, चलिए! बहुत देर हो गयी है ! अभी इसके बारे में किसी से बात नहीं करना ,वरना कंपनी की बदनामी होगी,जो आपको भारी पड सकती है !
सब लोग वहासे निकले,लेकिन चाफळकर मैडम बड़बड़ करती रही।
“मैं यहाँ नहीं रहूंगी.यहाँ कभी वापस नहीं आउंगी।”
मि. चाफळकर उनको शांत करने का प्रयास करते रहे।
कुछ देर सब अपने अपने घर लौट गए, तब तक रात हो चुकी थी।
दिन गुजरते गए, फ्लैट का काम पूरा होता रहा , इधर चाफळकर फॅमिली के घर माहौल भी नार्मल हो गया। कुछ ही दिनों में कम्पनी का इनविटेशन कार्ड आया ! फ्लैट का पजेशन लेने के बारे में ! बाकि लोगो की तरह चाफळकर फॅमिली वह रहने को आ गयी।
और एक दिन.. चाफळकर मैडम घर पे अकेली थी , बच्चे पढाई के लिये बाहर रहते थे ,मि.चाफळकर देर रात तक घर पोहोचे, और बेल बजायी। दरवाजा नहीं खुला!दो तीन बार ट्राय किया ,लेकिन रिस्पांस नहीं आया। उन्हें याद आया, उनके पास एक चाबी थी ,वह ढूंढ के दरवाजा खोला , मैडम को आवाज़ दी।
घर में पूरा अँधेरा था ! मि. चाफळकर लाइट ऑन करते गए, एक एक रूम चेक करते गए, उनकी बैडरूम का लाइट ऑन किया और सामने जो देखा उससे काँप गए ! जान हलक में आ गयी !सर चकराने लगा ……
चाफळकर मैडम सीलिंग से लटकी हुई थी !
जबान बाहर थी !
और नजर उन्हें घूर रही थी !
जैसे उनसे सवाल कर रही हो , मै यहाँ आने से मना कर रही थी अगर मेरी बात मानते तो ? …
आज मै ज़िंदा होती…..! उनकी हालत मि. चाफळकर से देखि नहीं गयी ! वो बेहोश हो कर वही गिर गए। ……
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भाग 2
वक़्त गुजरता गया , कुछ देर बाद मि. चाफळकर को होश आया। सामने जो था ,वह देखके थर थर कापने लगे !
जो हुआ था , वह काफी भयानक था,लेकिन सच्चाई थी! अगर मैडम की बात मानते तो आज मैडम जिन्दा होती। मैडम वहा रहने के लिए राजी नहीं थी। और कंपनी पैसे वापस देने से मना कर रही थी। कारण पूछ रही थी , इन्होने बताया भी, लेकिन इनपर कौन यकीन करता?
लेकिन अभी जो हुआ वह सच्चाई थी ,वह एक्सेप्ट करना , उसका स्वीकार करना अनिवार्य था ! मि. चाफळकर ने हिम्मत से काम लिया। जो करना था उन्हें ही करना था , बच्चे तो वहा नहीं थे। उन्होंने सिक्योरिटी को फ़ोन लगाया।
और कुछ ही देर में पूरा इलाका दंग रह गया ! कुछ लोगो के होश उड़ गए। पुलिस आयी ,इंक्वायरी हुई, क्रॉस चेकिंग हुई। चाफळकर के बच्चोको बुलाया गया। उन्हें तो समझ नहीं आ रहा था, की ये क्या हो गया ?
दिन गुजरते गए,पुलिस अपना काम करती रही , और एक दिन बातो-बातो में मि. हर्डीकर के साथ बाते करते हुए मि. चाफळकर ने बोल ही दिया, वो भी शायद उनके बोलने का इंतजार कर रहे थे।लेकिन उन्होंने अलग ही तार छेड़ दी।
” मि. चाफळकर सॉरी, लेकिन आपको मालूम था ये होने वाला है,आप टाल सकते थे, मैडम ने उस औरत को यहाँ आने से पहले मरते हुए देखा था। लेकिन शायद चेहरा नहीं देखा होगा, वरना यहाँ आती ही नहीं। आपका उनपे भरोसा करना गलत नहीं होता। ”
मि. चाफळकर निराश होकर बोले,
” आप शायद सही कह रहे है, लेकिन ऐसी बातो पे कौन विश्वास करता है ? ”
” क्योकि उस दिन और लोगो को भी ऐसे ही अविश्वसनीय अनुभव आए थे। ” हर्डीकर रहस्यमय आवाज में बोले।
मि. चाफळकर को जैसे झटका लगा।” व्हॉट ? ”
“हां “- मि. हर्डीकर।
” तो कोई कुछ बोला क्यों नहीं ? ”
” क्यों की हर कोई अपने आपको पढ़ा-लिखा समझता है, और हमने मान लिया तो सब हसेंगे, इसलिए कोई कुछ नहीं बोला, लेकिन आपके घर ये हादसा हुआ, तो बाते एक एक करके सामने आ गई। ”
“ज़रा डिटेल में बताएंगे ? ” मि. चाफळकर ने पूछा।
” टॉवर नं -1 में 10 वी मंजिल पर ब्रिगेंजा फॅमिली का फ्लॅट है। ”
” तो ? ”
” उस दिन जब हम यहाँ फ्लॅट देखने के लिए आए थे,तब ब्रिगेंजा फॅमिली भी आई थी। मिसेस. ब्रिगेंजा किचन में घूम रही थी तो उन्हें ये एहसास हुआ की कोई है उनके अलावा यहाँ घूम रहा है। वो उस एहसास का पीछा करते हुए उसके पीछे गई।
तो वो जो कुछ भी था, वो बालकनी की तरफ बढ़ा। इसलिए मिसेस. ब्रिगेंजा बालकनी में गई तो उन्हें ऐसा नजर आया की बालकनी से कोई निचे गिर रहा है। उनकी जान हलक में आ गई। वो घबराके देखने लगी तो कोई निचे गिरता हुआ नजर आया, मिसेस. ब्रिगेंजा को इतनी ऊंचाई की आदत नहीं थी, उनका सर चकराने लगा, और वो पीछे खिसक गई। ”
चाफळकर पीछे सरक के बैठ गए।
” इसका मतलब एक ही है ! ”
”क्या ? ” हर्डीकर ने पूछा।
” इसका मतलब मिसेस.ब्रिगेंजा बालकनी से निचे या तो गिरने वाली है या कूदने वाली है, मतलब उनकी जान खतरे में है। ”
”क्या ? ” मि. हर्डीकर उछल गए।
मि. चाफळकर बोले, ” हमें उनको बताना पडेगा। ”
” अरे क्या बताएंगे वो ब्रिगेंजा किसी के साथ सीधे मुँह बात भी नहीं करता। “
” और ! ” मि. हर्डीकर बोलते बोलते रुक गए।
” और क्या ? ” – मि. चाफळकर।
” उस मेहता का क्या ? अरे मि. मेहता ने खुद का अनुभव बताया था। क्या ? हां वह बहुत देर तक बहार ही रहता है। घर पे आने का कोई टाइम फिक्स नहीं।
एक दिन ऐसेही देर रात घर आया, तो गेट पे सेक्युरिटी नहीं था। मेहता ने आवाज दिया, ”सेक्युरिटीsss ” बहुत देर बाद सेक्युरिटी वहापे दाखिल हुए
। ”WHAT IS THIS ?” मेहता को ग़ुस्सा आ गया।
” रात का वक़्त है, गेट पर पेहेरा देने की बजाय तुम लोग टाइमपास क्या कर रहे हो ?”
” ओ साहब जरा आराम से बात कीजिए, हम हमारी ड्यूटी ही कर रहे है। हमें सब जगह ध्यान रखना पड़ता है, ये केसरे” – उसने सेक्युरिटी का नाम बताया।
” ये राउंड पे था। तो दो नं टावर से कुछ अजीब अजीब आवाजे आ रही थी। इसलिए ये बिल्डिंग में गया, लेकिन आवाज गूंज रही थी, कौनसे फ्लोर से आ रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था। इसलिए वो यहाँ गेट पर आया और मुझे रिपोर्टिंग की। ”
”तुम्हारा नाम ?”
” मै बशीर।”- तो हम दोनों वापस वहा गए, आवाज आती रही। कहासे किस फ्लोर से पता नहीं चला। इतनेमे आपने आवाज दी तो हम इधर आ गए। ” मेहता सोच में पड़ गया,
”लेकिन अगर आवाज आ रही थी, तो किसीने कंप्लेंट नहीं की ?”
” साहब उसी वजह दिमाग घूम गया है। हमने दो तीन फ्लॅट में पूछताछ भी की, लेकिन किसी को आवाज नहीं आ रही थी। हर कोई हमारी तरफ शक की निगाहो से देख रहा था। एक आदमी ने सीधा बोल दिया, ” सेक्युरिटी हो या बंदर ? जो उछल रहे हो ? जाओ गेट पर पेहेरा दो। व्यक्ति बुजुर्ग थी इसलिए हम चुप रहे। ”बुजुर्ग व्यक्ति ? वो पारशी बाबा ? फ्लॅट नं – 27 ? ”
” हां ” केसर और बशीर ने एकसाथ हामी भरी।
“लेकिन कैसे पॉसिबल है ? उस फ्लॅट में तो कोई नहीं रहता।”
“साहब क्या मजाक कर रहे हो?”
“मै मजाक क्यों करूंगा ? ये क्या मजाक का वक़्त है ? वो पारशी बाबा का लड़का और बहु बड़ोदा में रहते है यहाँ वो अकेला रहता था। बूढ़े को बहुत अकड़ थी। किसी के साथ बात नहीं बनती थी। इसी वजह से अकेला रहता था। और कुछ दिन पहले उसकी डेथ हो गयी !”
“क्या ?” दोनों सिक्योरिटी हैरान हो गए। मेहता दुबारा बोला
” हां ! उसे अटैक आया था। वो डर गया था, मरते समय कुछ इशारे कर रहा था। मुँह से शब्द नहीं निकल रहे थे। तो वो क्या बताना चाहता था वो किसी के पल्ले नहीं पड़ा ! “
“साहब अभी बहुत हो गया आप अभी निकलिए !” बशीर को गुस्सा आ गया था। मेहता के ध्यान में आ गया ,की इसे ये बात हजम नहीं हुई। तो उसने उसकी ओर घूरते हुए देखा , और बोला “फिर ठीक है हम दोनों साथ में चलते है ,चेक करते है कौन सही है ,कौन गलत?”
बशीर सोच में पड़ गया। क्या करे ? जाना तो पड़ेगा ! ये इतना बता रहा है !
उसने केसरे को गेट पर रुकने के लिए बोला , और दोनों टावर नं.२ की तरफ बढे ,रात का वक़्त ! चारो ओर सन्नाटा ! गाड़ियों के आवाज़ के सिवा कोई आवाज़ नहीं थी। वो जैसे ही टावर नं २ के पास पहोचे ,आवाज आने लगी ,तो मेहता चौक गया। आवाज़ करीब से आ रही थी। पर समझ में नहीं आ रहा था की कहा से आ रही है।आवाज़ गूंज रही थी। बशीर का दिमाग घूम गया ,उसके मुँह से गाली निकल गयी।
” ये आवाज़ किस चीज की है ? “मेहता ध्यान दे कर सुनने लगा। किसी की आवाज़ आ रही थी जो मुँह से निकलती है।
“बशीर ये कुछ अलग ही है,किसी को अगर भूत बाधा होगयी, किसी पर आत्माओ का साया रहा तो ये ऐसी ही आवाज़ निकालते है,घूमने जैसी हुंकार निकालते है !”
बशीर को दुबारा गुस्सा आ गया।
” साहब दिमाग ख़राब मत करो,जब से आये हो तब से कुछ न कुछ बोले जा रहे हो ,आप बाहर रहते हो ,हमें यहाँ बारह बारह घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है ,ऐसे बोलते रहोगे तो यहाँ कौन रुकेगा ?” मेहता समझ चुका, चुप बैठना ही ठीक रहेगा। ये जब खुद देखेगा तब यकीं करेगा।
तब तक ॐ शान्ति !
मेहता कुछ बोला नहीं, लिफ्ट से जाने के बजाय वो सीढ़ियों से ऊपर जा रहे थे। आवाजे आती रही । फ्लॅट नं- 27 के पास पहुंचे … बशीर का ध्यान ताले की ओर गया। और वो हैरान हो गया ! कुछ देर पहले वो यहाँ आके गए थे, यहाँ से कोई बाहर गया नहीं, हमें दिखा भी नहीं, तो ताला कैसा ? उनकी आहट से आवाज बंद हो गयी थी। खामोशी चारो ओर फैली थी। रात के करीब करीब दो बजे होंगे !
लेकिन डरने से कुछ होने वाला नहीं था .. क्या हो रहा है, देखना जरुरी था। मेहता चुपचाप था। बशीर आगे बढ़ा उसने बेल बजाई। रिस्पॉन्स नहीं मिला। उसने दोबारा बेल बजाई। और वो आवाज आने लगी। और……. अभी आवाज बढ़ गयी थी। करीब आ रही थी, दरवाजे के करीब।
“चले जाओ यहाँ से !…… “
और कुछ जोर से आकर दरवाजे से टकराया। आवाज आदमी की थी या औरत की पता नहीं चल रहा था। लेकिन ऐसी आवाज थी, की दोनों के पसीने छूट गए… वैसे बशीर पीछे हट गया।
मेहता ने उसे समझाया,
” हम यहाँ से निकलते है। सुबह देखते है, क्या करना है वो।”
बशीर को भी ठीक लगा, यहाँ ख़तरा था। ये कुछ अलग ही था जब से इस अपार्टमेंट में आया था, कुछ ना कुछ अजीबो गरीब घटनाए घट रही थी। रोज कुछ ना कुछ नया सुनने को मिल रहा था। वह सिक्युरिटी इंचार्ज था, उसकी जिम्मेदारी थी। किसी को बताए भी तो क्या बताए ?
जो कुछ करना था वो उसेही करना था।
वह सोच रहा था, इतने सालो से नौकरी कर रहा हु, लेकिन ऐसी अजीब घटनाए एक जगह, एक साथ, कही भी नहीं घटी थी, नौकरी छोड़ना पॉसिबल नहीं था। सिवाय इसके ये जिम्मेदारी थी, कर्तव्य था। इससे कैसे भागता वो तो करनाही पडेगा।
ड्यूटी इज ड्यूटी !
दोनों गेट पर पहुंचे बशीर ने मेहता को केबिन में बिठा लिया। दोनों ने पानी पीया। बशीर ने पूछा,
” मेहता साहब एक बात पूछनी थी,…… इसका क्या इलाज है ?”
मेहता क्या बताता ? जवाब तो उसके पास भी नहीं था, वो चुपचाप बैठा रहा।
यह सब बाते सुनकर मि. चाफळकर सोच में पड़ गए, हर्डीकर चुपचाप बैठे थे। वो भी सोच रहे थे।
“हर्डीकर अभी क्या कर सकते है ? “मि. चाफळकर ने पूछा।
” मि ब्रिगेंजा और मि. मेहता को मिलना क्या सही रहेगा ?”
“मेहता अभी नहीं मिल पाएगा उसे फोन करता हूँ। ” मि. हार्डिकर ने मेहता को फोन लगाया। लेकिन फोन एंगेज था।
“ ब्रिगेंजा है क्या वो देखते है। बताना अपना काम है, सुनना न सुनना उनकी मर्जी। ‘‘
इतने मे मेहता का फोन आ गया , वो घर पे ही थे मिलना जरुरी था तो उन्होंने घर पे बुलाया। मेहता अच्छा आदमी था। उसने खुले दिल से दोनों का स्वागत किया। चाय पानी होने बाद बात मुद्दे पे आ गयी। तो मेहता सिरिअस हो गया
” मुझे लगता है जल्द से जल्द ब्रिगेंजा फॅमिली से मिलते है , ब्रिगेंजा रहेगा तो ठीक, नहीं तो मैडम को एलर्ट कर देंगे। ”
मेहता, हर्डीकर, चाफळकर ब्रिगेंजा के फ्लॅट पर पहुंचे। ब्रिगेंजा अभी घर पे आए थे , उन्होंने दरवाजा खोला।
” yes ?”
उसने दरवाजे में ही पूछा, तीनो को अटपटा लगा।
”बोलिए ! ”
“ऐसे नहीं बता सकते , बैठ के बात करनी पड़ेगी।”
” ठीक है, आइये !” ब्रिगेंजा की जैसे मज़बूरी थी,
कहा से शुरुवात करे ? क्या बताए ? समझ नहीं आ रहा था।
” बोलिए !” उनकी आवाज सुनकर मैडम बा हर आ गई वो अच्छे स्वभाव की थी. उन्होंने सब को चाय – पानी पूछा। हर्डीकर से रहा नहीं गया,
उन्होंने बोल दिया,
” मॅडम आपकी जान को खतरा है,”
” क्या ?” ब्रिगेंजा सर, और मॅडम के मुँह से चीख निकल गयी। उन्हें समझ नहीं आ रहा था, की ये ऐसा क्यों कह रहे है ?
उनके घर पर मेहमान आए थे, उनका छोटा लड़का था, पांच – छे साल का। वो बहुत शरारती था ! पुरे घर में उछल -कूद कर रहा था। वो आकर मॅडम की गोद में बैठ गया। और झट से उठ कर बालकनी की ओर भागा।
” एलेक वहा मत जाओ, गिर जाओगे !”
लेकिन वो कहा सुनने वाला था, वो बालकनी की ओर ही भागा। ब्रिगेंजा मैडम उसकी फ़िक्र में उसके पीछे भागी। आदत नहीं थी, इतनी भागदौड़ करने की, दम लगने लगा, हांफने लगी ! सर चकराने लगा, तो जैसे तैसे बालकनी की रेलिंग के पास पहुंची।
सर चकरा रहा था ! नजर निचे की ओर गई तो चक्कर आ गया , बॅलन्स बिगड़ गया, ब्रिगेंजा मॅडम रेलिंग से, बालकनी से निचे गिर गई।
उनकी आवाज सुनकर सब बालकनी की ओर भागे….. लेकिन तब तक देर हो गई थी…….
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