कुत्ते – कमीने  |  FACT & REALITIES | लेखक :- श्री. योगेश वसंत बोरसे |

                                                           

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                                                                                PRESENT 

                                  -: कुत्ते – कमीने – 

                                                                          FACT & REALITIES :-

 लेखक :- श्री. योगेश वसंत बोरसे .

सुचना :-

   यह एक विडंबन है ,हर कोई सहन नहीं कर सकता ! तो कृपया कमजोर दिलो दिमाग वाले न पढ़े !

   सोचने वाली बात है ,किस होशियारचंद ने कुत्तो को कमीना कहा ? 

या फिर कमीनो के साथ कुत्तो की बराबरी की ! 

कुत्ते तो वफादार होते है , ईमानदार होते है ! 

कमीने तो इंसान है ! ये इंसान का गुण है ,जिस थाली में खाते है उसीमे छेद करते है ! और उस छेद में ऊँगली डालकर इतना बड़ा कर देते है की वो थाली न तो उनके काम की रहती है न दुसरो के काम की ! 

 पर कुत्ते वफादार होते है ! घोडा भी वफादार होता है ! ईमानदार होता है ! 

हर प्राणी के हर पशु पक्षी के अपने गुण है ,अपनी विशेषताएं है ! अपना स्वभाव है ! अपना धर्म है जो वो मरते दम तक निभाता है ! 

बस एक इंसान है जिसका कोई एक स्वभाव नहीं , कोई एक धर्म नहीं ! 

हर वक्त समय देखकर रंग बदलना ,धोखा देना ,मतलब के लिए कुछ भी करना यही इंसान की फितरत है ! कुछ भी करता है ,कुछ भी बोलता है ! 

बातो बातो में बात का मतलब बदल देता है , बात का बतंगड़ बना देता है ! 

     लेकिन मै  ये सब क्यों कह रहा हूँ ? 

मै भी तो इंसान हूँ ! 

तो मै कुत्ता हूँ या कमीना हूँ ? 

मतलब वफादार हूँ ?

 ईमानदार हूँ या एहसान फरामोश हूँ ? 

अब आयी बात समझ में ? 

  की अगर हम वफादारी करते है तो हमारी तुलना कुत्तो से की जाती है ! 

 कोई अगर अपनी बीबी से बेहद प्यार करता है , उसकी हर बात मानता है तो कहते है की अरे उसकी बीबी ने उसके गले में पट्टा डालकर रखा है ! 

   वो कुत्ते की तरह उसके पीछे ही घूमता है ! और हैरानी की बात ये है की उस औरत को भी अच्छा लगता है ! 

 अगर कोई इंसान इश्क मिजाज है तो वो लड़कियों के पीछे घूमता रहता है ,उसे भी कहा जाता है की ये कुत्ते की तरह लार टपकाते घूमता है ! क्या किसी कुत्ते को किसी लड़की के पीछे लार टपकाते घूमते देखा है ? 

  अभी कोई होशियारचंद कहेगा की अरे इसे तो इतनी भी समझ नहीं ये तो केवल मुहावरा है !

लेकिन सच तो ये है की हम इन मुहावरों को ही असली मानकर अपनी जिंदगी बसर करते है ! 

   इनफैक्ट हमने इंसानो को तो बदनाम किया ही है पर जानवरो तक को नहीं छोड़ा ! 

  तो –

   इसी बात पर एक दिन कुत्तो ने होशियारचंद को घेर लिया ,तो होशियारचंद डर गया ! बौखला गया ! उसे समझ नहीं आया की इतने सारे कुत्ते कहाँ से आ गए ? और उसे घेर क्यों रखा है ? और हैरानी की बात ये थी की उनमे से कुछ कुत्ते तो इंसानो जैसे दिख रहे थे ! 

  तभी एक कुत्ता बोल पड़ा ,तो होशियारचंद दंग रह गया ! 

  ‘ कुत्ते बोलते भी है ? ‘ 

     ” चलो ! ” 

     “कहाँ ?”

    ” बॉस ने बुलाया है  ! “

    ” किसने ? हमारे बॉस ने ! “

   “क्यों ?”

  ” वो तो वही बताएँगे ! “

  होशियारचंद को मजबूरन जाना ही पड़ा ! 

  रात का वक्त ! सुनसान सड़के ! एक सुनसान सड़क पर ये बारात निकली ! होशियारचंद बिच में ,चारो ओर कुत्ते ! 

  कुछ ही देर में ये बारात अगले मोड़पर रुक गयी।  वहाँ एक काला  कुत्ता आराम से पत्थर पर बैठा था !  

” बॉस ये है होशियारचंद ! ” 

“पता है ,तभी तो इसे पकड़कर लाने को कहा था ! 

आओ होशियारचंद ,वफादारों की दुनिया में तुम्हारा स्वागत है ! “

“मुझे समझ नहीं आ रहा है की मुझे यहाँ किस लिए लाया गया है ? “

“तुम लोग हमारी बदनामी करते हो इसलिए ! “

“मैंने ? मैंने क्या किया ? ” 

“हमें कमीना कहना बंद करो ! “

” पर मैंने कब कहाँ ? ये तो पूरी दुनिया कहती है ! “

“कोई कुछ नहीं कहता ! ये तो तुम इंसानो की फितरत है ! हर किसी को कुछ न कुछ कहते रहते हो ! सबसे ज्यादा शोरगुल तो तुमने मचा के रखा है ! इनफैक्ट हम लोगो को नाम भी तुम ने ही दिया है ! हमें कुत्ता बना दिया ! अरे हम क्या लाचार है ? हम लार टपकाते है ? लड़कियों के पीछे घूमते है ? ये तुम लोगो की प्रॉब्लम है तो तुम लोग सॉल्व करो न  ! हमें क्यों बदनाम करते हो ? 

आज से ये सब कुछ बंद होना चाहिए ! नहीं तो हम कुत्ते तुम इंसानो का वो हाल करेंगे की हमें वफादार कहना भूल जाओगे ! फिर तुम ही कहोगे कुत्ते बहोत कमीने होते है ! हमें अपना कमीनापन दिखानेपर मजबूर मत करो ! हम तुम्हे कही का नहीं छोड़ेंगे ! “

” लेकिन मै अकेला क्या कर सकता हूँ ?”

 ” क्यों ? होशियारचंद तो तुम ही हो ! सब को ज्ञान बाटते फिरते हो की सोच बदलो , खुद को बदलो तो दुनिया बदलेगी ! तो खुद को सही में क्यों नहीं बदलते ? क्यों ढोंग करते हो ? अंदर से कुछ ,बाहर से कुछ ? अगर खुद को बदलना नहीं है तो दुनिया बदलने की बात क्यों करते हो ? जो तुम नहीं कर सकते ? ……. 

बोलो ? जवाब दो ! क्या सचमुच दुनिया बदल सकते हो ? 

  अरे दुनिया वही की वही है ! तुम बदल गए हो ! अपने मतलब से अपनी जरूरतों के हिसाब से सबका इस्तेमाल करते हो ! अपने माँ बाप को ,अपने बच्चो तक को नहीं छोड़ते ! सबसे उम्मीदे है तुम्हे ! हमसे भी उम्मीद है वफादारी की ! बस तुम खुद कुछ मत करना ! 

देखो ये आखरी चेतावनी है तुम्हे होशियारचंद ! अपनी होशियारी का इस्तेमाल करके हमें कुत्ता कमीना कहना बंद कर दो ! आठ दिन है तुम्हारे पास ! बस आठ दिन !  अगर तुम कामयाब नहीं हुए तो हमें अपना कमीनापन दिखाना पड़ेगा ! जाओ अब !…… छोड़ दो इसे ! “

…. बॉस  ने कही हर एक बात सच थी !

होशियारचंद कुछ न बोल सका ! उसकी हेकड़ी निकल गयी थी ! 

   ‘अगर एक कुत्ते को इतनी समझ है तो मै क्या कर रहा हूँ ?

 क्या मै सचमुच बदल गया ? 

या फिर बिलकुल नहीं बदला ? 

और आठ दिन  में मै क्या कर लूंगा ? ‘

 होशियारचंद निचे मुंडी करके खड़ा था ! 

“जाओ अब ! क्या यही डेरा जमाना है ? या कुछ करने की कल्पना मात्र से हाथपांव फूल गए ? जाओ !  “

“चलो होशियारचंद जी ,बॉस को गुस्सा मत दिलाओ वरना तुम्हे खड़े खड़े यही फाड़ देगा और हमारी दावत हो जाएगी ! वैसे तुम्हे यही लगता है न की हम कुत्ते तुम्हारा क्या बिगाड़ लेंगे ? तो अब देखना और उसके लिए जिन्दा रहना !   तुम्हारे लिए इतना काफी है ! ” 

इतना कहकर वो कुत्ता भी निकल गया ! 

होशियारचंद की होशियारी अकेली पड़ गयी ! कुत्तो तक ने उसका साथ छोड़ दिया ! 

अब क्या करे ? ….

    TO BE  CONTINUED …… 

➤➤➤➤➤

आशा है आप भी इस बात से इत्तेफाक रखते होंगे !

अगर सब्जेक्ट अच्छा लगा तो जरूर बताइये ताकि हम आगे बढ़ सके ! आपके कमेंट्स की प्रतीक्षा रहेगी ! आपका – योगेश वसंत बोरसे 

  Author - Yogesh vasant borse

   

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