मौत की आगोश मे | Maut Ki Aagosh me | हिंदी भयकथा संग्रह | Collection of Hindi Horror Stories

                            हिंदी भयकथा संग्रह – 
                           
                     – मौत की आगोश मे – 
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लेखक – योगेश वसंत बोरसे

 १ } शापित झील   २} तळण  3 } हवेली  ४ } आसरा  ५ } अकस्मात  ६ } आमराई  ७ } शांताबाई  ८ } रेल्वे track ९} popcorn  १० } अनपेक्षित { अनहोनी } 
Sample :- 

 1 } अभिशापित सुंदरता – शापित झील

 

  बहोत साल पहले, जब पीने के पानी के लिए नदियों, झरनों और कुओं का इस्तेमाल होता था, तब एक गाँव के पास एक झरना बहता था। उस झरने का पानी अत्यंत मीठा था। गाँव के सभी लोग इस झरने का पानी पीने के लिए इस्तेमाल करते थे, और उससे थोड़ा आगे एक बड़ा जलाशय बन गया था। 

 इस पानी का उपयोग वे अपने पशुओं को पिलाने, नहलाने, कपड़े धोने और खुद नहाने के लिए करते थे। बच्चे दिन भर पानी में, जलाशय में कूदते रहते थे। गाँव सुखी था।

प्रकृति में, हमारे आस-पास कुछ शक्तियाँ अच्छी होती हैं और कुछ बुरी। उन बुरी शक्तियों को किसी का सुख देखा नहीं जाता और वे अपना प्रभाव दिखाती हैं।

 ऐसी ही एक शक्ति ! 

उस शक्ति ने पानी पर अपना प्रभाव डाला और जिसका परिणाम होना था, वही हुआ। जिसने भी वह पानी पिया, वह तड़प-तड़प कर मर गया, और जिन्हें नहीं मिला, जिन्होंने नहीं पिया, वे बिना पानी के तड़प-तड़प कर मर गए। क्योंकि पानी का दूसरा कोई स्रोत नहीं था। जानवर भी तड़प-तड़प कर मरने लगे।

दो रातें, दो दिन… पूरा गाँव समशान  में बदल गया था।

 कौन किसका अंतिम संस्कार करता ?

समशान ! 

पुरा समशान  !

अगली रात आई। भयानक रात ! 

   चारों ओर अंधेरा ! इतने अंधेरे में कोई उस गाँव में आया था। हाथ में रोशनी लिए। शायद एक लालटेन रही होगी। 

  गाँव की दुर्दशा देखकर उसे असुरों जैसा आनंद हुआ था। उसने आधा काम कर लिया था। उसने गाँव की घास, पूली, लकड़ियाँ, सबको आग लगा दी। पूरा गाँव आग की भेंट चढ़ गया। लाशें जलने लगीं। जानवरों के शरीर जलने लगे। और मांस जलने की तीव्र गंध वातावरण में जमने लगी, फैलने लगी।

 उस गंध से उसे बहुत आनंद हुआ होगा। वह हाथ फैलाकर गहरी साँस लेकर उस गंध को सूंघने लगा। और थोड़ी देर में एक गड़गड़ाहट भरी हँसी बाहर निकली।

कुछ ही क्षणों में उसे लगा, मैंने गलती कर दी। ऐसे तो इनकी आत्माओं को शांति मिल जाएगी। ये पूरी तरह जलने नहीं चाहिए। 

उसने अपनी अन्य शक्तियाँ जाग्रत कीं। वे शक्तियाँ हाथ जोड़कर सामने खड़ी हो गईं।

“आज्ञा स्वामी…”

” इन सभी लाशों को पानी में फेंक दो ! इनकी आत्मा को शांति नहीं मिलनी चाहिए। मुझे ये सभी आत्माएं अपने वश में रखनी हैं। जाओ…!” 

और वे शक्तियाँ तेज़ी से काम में लग गईं और कुछ ही क्षणों में सभी लाशों का ढेर जलाशय में गिरता गया। अधजली लाशें पानी में गिरने से अजीब सी बदबू पूरे वातावरण में घुल गई।

  इतना सुंदर गाँव एक दुष्ट शक्ति के कारण श्मशान में परिवर्तित हो गया था। उस दिन से वह व्यक्ति उस परिसर में डेरा डालकर बैठ गया। और अपने अघोरी कृत्य करता रहा। उसका प्रभाव बढ़ता गया और आस-पास सब जगह यही भयानक दृश्य दिखने लगा।

…. समय बीतता  गया ………. 

 कई साल गुजर गए ……….

 समय के साथ वह व्यक्ति विलुप्त हो गया। पर उसने जो कृत्य किया ? 

 उसके परिणाम पीछे रह गए थे। लोग मर गए थे। गाँव नष्ट हो गया था, पर झरना ! वह तो जीवित था। उसका पानी बहता ही रहा। बस आस-पास का परिसर नकारात्मक ऊर्जा से भर गया था।

 साल-दर-साल बीत गए। प्रकृति ही तो है, परिवर्तन होता गया, और इस जगह पर जहाँ नरसंहार हुआ था, वहाँ प्रकृति ने अपना चमत्कार दिखाना शुरू कर दिया था  ! 

 नई बहार, नई लताएँ-बेलें, पेड़-पौधे, पत्ते-फूल। झरना होने के कारण उस परिसर को स्वर्ग का स्वरूप प्राप्त हो गया था। इतना कि ऐसी सुंदरता दुनिया में कहीं नहीं होगी।

  देखते ही देखते वहाँ जंगल बन गया। पर एक आश्चर्य था, एक भी जानवर नहीं था। पक्षी आते थे, दिन भर चहचहाते थे और अपना भोजन लेकर दिन ढलते ही दूसरी जगह निकल जाते थे।

  प्रकृति ने सब बदल दिया था, पर वहाँ की नकारात्मक ऊर्जा को वह कम नहीं कर सकी  ! 

 और….. एक दिन…..

 To Be Continued …… 

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