Jhoomati Maut | हिंदी भयकथा संग्रह | झूमती मौत | Hindi Horror Stories Book |

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Sample :- 

आषाढ़ की मूसलाधार बारिश !

ऊपर से अमावस्या ! { आषाढी अमावस्या को हम गटारी अमावस्या कहते है }

बारिश जैसे कह रही थी, ” मैं थमने वाली नहीं !”

रात गहरी होती गई, घना अँधेरा !

होटल में पार्टी करने के बाद एक पियक्कड़ (बेवडा, दारूबाज) बाहर निकला। वह इतनी  चढ़ाए  हुए  था कि उसे चलने की भी सुध नहीं थी। लड़खड़ाते हुए, गालियाँ देते हुए, वह होटल से बाहर आया।

बारिश लगातार मूसलाधार बरस रही थी, जिससे उसे एक अलग ही चिंता हुई। चिंता यह थी कि अगर वह बारिश में गया, तो उसकी शराब का नशा उतर जाएगा !

 वह आसमान की ओर देखता, हाथ हिलाता और गालियाँ बकने लगा। पर बारिश उसकी परवाह करने वाली नहीं थी। वह बरसती ही रही।

वह पियक्कड़ हार मानकर अंततः निकल पड़ा।

 पाँच मिनट में ही वह पूरा भीग गया। नशा थोड़ा उतरा ! तो वह सीधा घर की ओर चल पड़ा। गाड़ी उसके पास थी, पर उसने उसे होटल में ही रहने दिया। या तो वह भूल गया होगा, या जानबूझकर छोड़ दी होगी। उसे ही पता !

बारिश में भीगते हुए, वह रफी के नग़मे गाते – गाते चल रहा था। सड़क सुनसान !

 कुत्ते भी दुम दबाकर किसी ओट में बैठे थे! रात में अगर बारिश न हो, तो कुत्तों का ज़ोर बढ़ता है !

 और अमावस्या हो, तो वे सुर निकालकर रोते हैं ! पर बारिश हो तो वे भी कोई आसरा ढूँढ़ते हैं।

कहाँ की अमावस्या और कहाँ क्या ?

 एक दोपहिया वाहन (टू-व्हिलर) उस पियक्कड़ के पास से गुज़रा। जैसे ही उसके ऊपर पानी उछला, उसने उन्हें गालियाँ देना शुरू कर दिया। शायद वे भी पीए हुए थे। गाड़ी पीछे मुड़ी ! वे पियक्कड़ के पास आए और दो-तीन तमाचे मार दिए। यह भी कम नहीं था !

  देखते-ही-देखते बात मार-पीट तक आ गई। वे दो, और यह अकेला !…..

 कितनी देर टिकता ?

 वह सड़क पर गिर  गया ! उन्होंने उसे लातों और घूँसों से रौंद डाला !

जब उन्हें यकीन हो गया कि अब यह उठने वाला नहीं है, तो आखिरी लात मारकर, एक गाली बककर, उन्होंने अपनी गाड़ी को किक मारी और भाग गए !

मूसलाधार बारिश में कितना खून बह गया, पता ही नहीं चला। शायद घाव गहरे लगे थे।

काफ़ी देर हो गई पर वह पियक्कड़ नहीं उठा।

  यह सारा दृश्य एक पेड़ के नीचे खड़ा होकर कोई देख रहा था। वह बारिश रुकने का इंतज़ार करते हुए वहाँ खड़ा था। पर वह भी एक जेब कतरे जैसा बदमाश था। पियक्कड़ के गिरते ही उसने देर न करते हुए उसकी जेबें जाँचीं। जो कुछ था, वह सब माल निकालकर उसने ले लिया। और वापस पेड़ के नीचे अँधेरे में खड़ा हो गया।

कुछ देर बाद एक गाड़ी आई और उसके पास रुकी। वे उसके परिचित रहे होंगे। उसे होश में लाने की कोशिश की गई। उठाकर अस्पताल ले गए। पर खेल ख़त्म हो चुका था!

 पेड़ पर कुछ फड़फड़ाहट हुई, उसने ऊपर देखा, उसे लगा कोई पक्षी होगा, पर कुछ अलग ही था। उसने वहाँ से भागने की ठानी !

वह भी देशी शराब का प्रेमी था, सीधा देशी के अड्डे पर आया। जितनी पीनी थी पी, और झूमते हुए बाहर निकला !

‘मैंने जो किया, वह बुरा किया ! ‘

ऐसा उसे लगा और इस विचार से उसे रोना आ गया !

 ‘ मैंने बुरा किया, उसके पैसे निकाले, दारू पी ली ! ‘

 उसने भावनाओं के आवेश में आकर खुद के मुँह पर दो-तीन थप्पड़ मार लिए! आसमान की ओर हाथ करके माफ़ी माँगने लगा।

” सॉरीsss, सॉरीsss ! ” कहने लगा।

और तभी पीछे से आवाज़ आई।

 ” मैं यहाँ हूँ! सॉरी कहना है, तो मुझे बोलो !”

 बारिश लगातार जारी थी, और वह बीच सड़क पर खड़ा था ! आवाज़ आई और बारिश के थपेड़ों से उसका नशा भी थोड़ा उतरा। उसने आँखें छोटी करके अँधेरे में गौर से देखा, साफ़ कुछ दिख नहीं रहा था! कुछ तो हिलता हुआ दिख रहा था।

” कौन है  रे तू ? इतना हिल क्यों रहा है ? “

 ” मैं वही हूँ, जिसके तूने पैसे निकाले ! मेरे पैसे ला ! “

 ” पर तुझे तो अस्पताल ले गए थे ! “

 ” अरे ! मुझे क्या अस्पताल ले जाते ! वे मेरी बॉडी को अस्पताल लेकर गए !

मैं यहीं घूम रहा हूँ कब से !”

” मतलब, तू ज़िंदा नहीं है ? “

” नहीं ! “

जिसने पर्स चुराया था, वह बुरी तरह डर गया था ! जैसे बन पड़ा, वैसे वह भागने लगा ! और पियक्कड़ की आत्मा उसके पीछे पड़ गई !

 ” मेरे पैसे दे ! ” कहकर!

 जेब कतरे को रोना आ गया,

 “अरे ! तेरे पैसों की दारू पी ली, अब पैसे कहाँ से लाऊँ ! सॉरी बोला न तुझे ! “

पर पियक्कड़ की आत्मा सुनने को तैयार नहीं थी।

 ” मेरे पैसे दे, नहीं तो दारू पिला ! “

” अरे, पर तू कैसे पियेगा ? तू तो मर चुका है ! “

 ” तेरे अंदर घुसकर पीऊँगा, पर पीऊँगा ! “

इतना सुनते ही जेब कतरा जान बचाकर भागने लगा।

उसका तमाशा देखकर एक गाड़ीवाला रुका !

 “क्या रे ! मरना है क्या ? “

 ” सड़क के बीच क्यों भाग रहा है ? कोई आकर उड़ा देगा ! “

 “अरे, यह मेरे पीछे पड़ा है !”

” कौन ? “

 ” अरे, यह देख  !”

 “अरे, पागल है क्या तू ? ज़्यादा चढ़ गई क्या ? अरे, तेरे पीछे कोई नहीं है ! “

 ” अरे, यह क्या पैसे माँग रहा है ! “

 “अरे ! अरे, बैठ गाड़ी में नहीं तो फ़ालतू में मरेगा ! “

  पर जेब कतरा होश में नहीं था !

 वह डर के मारे भागता रहा !

 पीछे देखकर हाथ हिलाता रहा !

 मिनन्नतें करता रहा !

 तभी सामने से एक बड़ा ट्रक आया, हॉर्न बजा-बजाकर थक गया पर इसका होश छूटा हुआ था !

ट्रक की और जेब कतरे की टक्कर हुई !

और धड़ाम से जेब कतरा ज़मीन पर औंधा पड़ा!

ट्रक ड्राइवर नीचे उतरा !

 दो-चार गालियाँ बकी !

इसके पैर पकड़कर एक तरफ़ किया। और रात के अँधेरे में फ़रार हो गया…

सूचना :-

यह इस किताब की एक कहानी है , आप को जरूर पसंद आई होगी !

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