एक था क्रिप्टो – हिंदी कहानी


लेखक :- श्री. योगेश वसंत बोरसे
Note :- यह शुरुवात है इस कहानी की … अगर पसंद आये तो जरूर comment करना …..
” अब आगे क्या करने का इरादा है ? “
” देखता हू, कूछ न कूछ तो कर लुंगा। आप टेन्शन मत लीजिये। “
“अरे अच्छी खासी नोकरी छोड दी ,अब उतना पैसा बाहर कमाना क्या तुझे आसान लागता है ?”
” तो बाबूजी आप ही बताइये मै क्या करू ? कंपनी बंद होने की कगार पर है । न पेमेंट दे रही थी न काम था।धीर धीरे तो सब बंद हो गया ! वो तो मैंने अब साहब से मिलकर बात की तो थोड़े बहोत पैसे मिल गए। उसमे कुछ काम धंदा कर लूंगा। “
” उसमे घर के खर्च चलेंगे ? “
” मुझे पता है बाबूजी ,थोड़ी मुश्किल होगी। लेकिन मै भी … “
” नहीं योगेश ,बात कुछ और है। “
” क्या ? “
” तुम्हारा पहले से नौकरी में मन नहीं लग रहा था ,तुम्हे बड़ा बनना है ,पैसेवाला बनना है। “
” तो बाबूजी इसमें गलत क्या है ? सबका सपना होता है बड़ा बनने का। अगर मैंने सपना देख लिया तो क्या गुनाह कर दिया ?”
” सपना देखना ठीक है बेटा ,पर अपने ऊपर की जिम्मेदारियोका एहसास भी होना चाहिए। “
” तो बाबूजी ,क्या मै अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा हूँ ? “
” अब तक तो निभा रहे थे ,लेकिन शायद अब आगे नहीं निभा पाओगे। “
” मतलब ?”
” देखो ,बेटा ,बुरा मत मानना , लेकिन मै और तुम्हारी माँ तुम पर बोझ नहीं बनना चाहते। “
” लेकिन आप से किसने कहा ,की आप मुझ पर बोझ है ? “
” बेटा ,हर बात कहनी या सुननी जरुरी नहीं होती। कुछ बाते इंसान को खुद समझनी पड़ती है। अगर वो वक़्त रहते समझ जाये तो बाद में पछताने की नौबत नहीं आती। “
” बाबूजी ये आप कैसी बाते कर रहे है ? क्या अगर मै कंपनी में नहीं लगता तो हमारा गुजारा नहीं होता ? “
” बात कंपनी की नहीं है , बात स्थायी इनकम की है। तुम ही बताओ ,अगर तुम नौकरी न करके कोई धंदा करते और उसमे बीस पच्चीस हजार कमाते तो क्या वो बंद करके कोई दूसरा काम ढूंढते ?”
” बाबूजी ? आप का सवाल ही गलत है। मैंने कंपनी अपनी मर्जी से नहीं छोड़ी। मजबूरी है। अगर पेमेंट ही नहीं मिल रहा है तो कितने दिन कितने साल उनका इंतजार करू ? बाहर मेरा कर्जा बढ़ रहा है। लोगो के ताने सुनने पड रहे है। आज ६ महीने हो गए कंपनी पेमेंट नहीं दे रही है। मेरे पास और कोई चारा नहीं था। आप चिंता मत कीजिये। मै कुछ कर लूंगा। .. “
बाबूजी ने चुप रहना ही ठीक समझा। उनकी उम्र अब लगभग ७० की हो गयी थी। योगेश से उन्हें बहोत प्यार था लेकिन वो उसको पैसो की मदद नहीं कर पा रहे थे इस वजह से परेशां थे। योगेश की शादी हो गयी थी। उसके भी दो लड़के थे उनकी पढाई ,रोज के खर्चे ,इनकी दवाईया।
लेकिन सब प्यार से एक साथ रह रहे थे। लेकिन पिछले ६ महीनो से घर का माहौल बिगड़ गया था। गलती बहु की भी नहीं थी। योगेश दिन भर ड्यूटी पर रहता। घर में खाने वाले पांच लोग। वो कहा से सब का पूरा करे ? बच्चो को तो बोल भी सकती थी। लेकिन सास -ससुर को कैसे बोले ?
वो अंदर ही अंदर घुट रही थी। उनकी शादी को भी १५ साल हो गए थे। बच्चो की पढाई का खर्चा बढ़ता जा रहा था। उसने योगेश से एक दो बार बात भी की ,कही जॉब पर लगने की, तो उसने मना कर दिया।
” देखो सिमा ,तुम दिनभर के काम से ऐसे ही थक जाती हो। क्यों अपनी जिम्मेदारियां बढ़ा रही हो ? तुम टेंशन मत लो ,मै कुछ करता हूँ। “
और। .. योगेश ने जॉब छोड़ दी।…….
To Be Continue …..
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